
रायगढ़ 29 मई छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत जी के बयान को लेकर भाजपा द्वारा की जा रही दुर्भावनापूर्ण बयानबाजी उनकी साफ- सुथरी ,बेदाग,निर्विवाद छवि को धूमिल करने और धार्मिक आस्था की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शाखा यादव ने कहा है कि चरण दास महंत ने अपने व्यक्तिगत राय व्यक्त करते हुए कहा था कि ” मैं रामभद्राचार्य को जगदगुरु नहीं मानता” वे भाजपा के प्रचारक की तरह काम कर रहे हैं यह व्यक्ति विशेष के लिए की गई व्यक्तिगत टिप्पणी है इस बयान को भाजपा जान-बूझकर तोड़- मरोड़कर पूरे संत समाज और सनातन धर्म से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। अभिव्यक्ति की आजादी हर किसी को है इसे कांग्रेस पार्टी से जोड़कर प्रस्तुत करना भाजपा की ओछी मानसिकता को प्रदर्शित करता है। महंत जी ने संत समुदाय, धर्म या सनातन परंपरा का अपमान नहीं किया है। भाजपा जानबूझकर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पार्टी सदैव सभी धर्मों, संतों और आध्यात्मिक परंपराओं का सम्मान करती आई है।
शाखा यादव ने कहा भारतीय संस्कृति संवाद,सहिष्णुता और विचारों की स्वतंत्रता की संस्कृति है,लोकतंत्र में किसी बयान से असहमति हो सकती है लेकिन भाजपा जिस प्रकार हर मुद्दे को धर्म और आस्था से जोड़कर राजनीतिक माहौल तैयार करने की कोशिश करती है वह समाज के लिए उचित नहीं है।
कांग्रेस पार्टी सदैव सभी धर्मों,संतों और आध्यात्मिक परंपराओं का सम्मान करती आई है लेकिन जब कोई धार्मिक मंच राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनता दिखाई देता है तब उस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और आलोचना भी स्वाभाविक होती है। लोकतंत्र में किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाना असम्मान नहीं माना जा सकता।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा हर मुद्दे को धार्मिक रंग देकर जनता का ध्यान देश की महंगाई,पेट्रोल,डीजल, गैस,के बढ़ते दामों,बेरोजगारी,आर्थिक संकट जैसे ज्वलंत मूल समस्याओं से भटकाना चाहती है। प्रदेश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, कानून व्यवस्था और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय भाजपा केवल धर्म की आड़ में भावनात्मक राजनीति कर रही है जबकि उप्र योगी सरकार के राज्य में विश्वविख्यात प्रयागराज महाकुंभ में हमारी धार्मिक आस्था के केंद्र श्री शंकराचार्य जी के अपमान पर भाजपा का मौन रहना दोहरे मापदंड को साबित करता है ।
शाखा यादव ने कहा संत समाज देश और समाज को दिशा देने वाली शक्ति है और कांग्रेस हमेशा उनका सम्मान करती रही है। लेकिन भाजपा हर संत और धार्मिक मंच को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रही है। धर्म और राजनीति का अत्यधिक मिश्रण लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द दोनों के लिए उचित नहीं है।
भारतीय संस्कृति सहिष्णुता, संवाद और आपसी सम्मान की संस्कृति है। मतभेद होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन भाजपा जिस प्रकार हर आलोचना को धर्म विरोध से जोड़ने का प्रयास करती है, वह समाज में अनावश्यक ध्रुवीकरण पैदा करने वाला है।
कांग्रेस पार्टी संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सभी धर्मों के सम्मान की विचारधारा पर चलती है।
प्रदेश में बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी,किसानों की समस्याएँ और बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था के साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विधवा पेंशन,दिव्यांग पेंशन छः महीनों से लंबित हैं, निकाय चुनाव के पहले महतारी वंदन योजना से छूटे हितग्राहियों को लाभान्वित करने के वायदे पूरा न करना जैसे अनेक मुद्दों से भाजपा मौन साधे हुए है और जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा धार्मिक विवाद खड़ा कर रही है भाजपा के पास जनहित के मुद्दों पर तो जवाब नहीं है इसलिए यह भावनात्मक और ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा ले रही है।
भाजपा को जनता के वास्तविक मुद्दों पर काम करना चाहिए, न कि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करना चाहिए।
भाजपा को अनावश्यक विवाद पैदा करने के बजाय जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। जनता अब गरीबों के विनाश पर विकास की भावनात्मक राजनीति नहीं, बल्कि सकारात्मक विकास, रोजगार और जनहित के कार्यों का जवाब चाहती है।


