
लक्ष्य न्यूज़ रायगढ़। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शाखा यादव ने वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भाजपा जब-जब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरती है, तब-तब भगवान श्रीराम की आस्था को ढाल बनाकर देश की जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है,यह भगवान श्रीराम के नाम का सबसे बड़ा राजनीतिक दुरुपयोग है।
शाखा यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था के केंद्र हैं। भगवान श्रीराम किसी एक दल की राजनीतिक जागीर नहीं, बल्कि समस्त समाज के आराध्य हैं। यदि राम मंदिर निर्माण से जुड़े किसी भी कार्यों में भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप सामने आये हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच की मांग करना , उसपर सवाल पूछना आस्था पर प्रहार नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के आस्था,सम्मान और मंदिर की पवित्रता की रक्षा की बात है।
यदि राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा की चोरी नहीं हुई है तो जांच किस चीज की हो रही है?
लेकिन जांच से पहले ही विपक्ष को “”कालनेमी” बताकर दोषियों को बचाने और घोटालों पर पर्दा डालने का प्रयास क्यों किया जा रहा है ??
शाखा यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि सवाल पूछने वालों को “कालनेमी” कहना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है, “कालनेमी” वह नहीं जो सच्चाई सामने लाने की बात करे,वास्तविक “कालनेमी” वह है जो भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति कर जनता की भावनाओं का दोहन करते हुए भ्रष्टाचार करे, जनता को गुमराह करे और आस्था की आड़ में घोटालों पर पर्दा डालने का प्रयास करे।
शाखा यादव ने कहा भाजपा हर चुनाव में भगवान श्रीराम का नाम पर वोट लेती है लेकिन श्रीराम के आदर्श- सत्य, न्याय और जवाबदेही से हमेशा भागती है, राम के नाम पर वोट और राम के नाम पर भ्रष्टाचार पर मौन , यही है भाजपा का असली चाल चरित्र और चेहरा,, भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि भगवान श्रीराम सत्य,न्याय और मर्यादा के प्रतीक हैं यदि श्रीराम के नाम पर बने ऐतिहासिक मंदिर में भ्रष्टाचार हुआ है तभी तो जांच की कार्रवाई की जा रही है ये स्वयं इस बात का प्रमाण है कि गंभीर शिकायतें सामने आई हैं ऐसे में दोषियों को बचाने के बजाय उन्हें बेनकाब किया जाना चाहिए। अन्यथा भारत में भाजपा के प्रति यही संदेश चरितार्थ होगा कि “राम-राम जपना, पराया-माल अपना”
शाखा यादव ने कहा कि भाजपा को इतिहास के पन्ने पलटने के बजाय वर्तमान के सवालों का जवाब देना चाहिए। प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं,बिजली दरों की लगातार बढ़ोतरी, बिगड़ती कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर तो सरकार मौन है, लेकिन हर सवाल का जवाब धार्मिक भावनाएं भड़काकर देने की कोशिश की जा रही है।
शाखा यादव ने स्पष्ट किया कि भगवानों के प्रति हमारी अटूट आस्था और श्रद्धा किसी प्रमाणपत्र की मोहताज नहीं है। भगवान श्रीराम सत्य, मर्यादा और न्याय के प्रतीक हैं। इसलिए यदि उनके मंदिर पर आस्था के नाम पर किसी ने 1₹ का भी भ्रष्टाचार किया है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई ही श्रीराम के आदर्शों का सच्चा सम्मान होगा, बाकी सब राजनीतिक नौटंकी है।
“राम के नाम पर राजनीति नहीं, राम के आदर्शों पर शासन चाहिए। सत्य सामने आना चाहिए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए”


