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केलो परियोजना बनी रायगढ़ की जीवन रेखा, कृषि विकास और जल सुरक्षा को मिली नई मजबूती केलो परियोजना ने बदली रायगढ़ की तस्वीर, कृषि विकास और जल सुरक्षा को मिला रहा ठोस आधार रायगढ़ की जीवनदायिनी केलो परियोजना से समृद्धि की नई धारा, कृषि विकास और जल सुरक्षा की बनी मजबूत आधारशिला कलेक्टर ने समीक्षा बैठक में सकारात्मक चर्चा, परिचर्चा कर विकास की श्रृंखला को आगे बढ़ाया

:लक्ष्य न्यूज़ जनवरी 2026/ रायगढ़ जिले की जीवनदायिनी केलो वृहद सिंचाई परियोजना आज जिले के कृषि आधारित विकास, जल सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि की मजबूत रीढ़ के रूप में स्थापित हो चुकी है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने 5जिला कलेक्टोरेट स्थित सभाकक्ष में केलो परियोजना की समीक्षा बैठक लेकर प्रभावित ग्रामों के प्रमुखों से सकारात्मक संवाद किया तथा परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

     बैठक के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने भू-अर्जन एवं पुनर्वास से संबंधित मुआवजा वितरण को मिशन मोड में शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने प्रभावित ग्रामों के प्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित निराकरण के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी प्रगतिरत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया।

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विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि केलो वृहद सिंचाई परियोजना को शासन से तृतीय पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। परियोजना की वर्तमान स्वीकृत लागत 1182.90 करोड़ रुपए है, जिससे शेष कार्यों को तीव्र गति मिली है। परियोजना अंतर्गत बांध, नहर एवं पुनर्वास के लिए कुल 2548 हेक्टेयर भूमि में से 2517 हेक्टेयर भूमि का अर्जन पूर्ण कर लिया गया है, जो लगभग 99 प्रतिशत है। अर्जित भूमि के बदले अधिकांश प्रभावित हितग्राहियों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है।

[1/23, 7:06 PM] rajesh sharma78073: केलो बांध के डूबान क्षेत्र से विस्थापित सभी परिवारों को पुनर्वास ग्रामों में निःशुल्क आवासीय भू-खंड, सड़क, बिजली एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ सुव्यवस्थित रूप से बसाया गया है। 01 जनवरी 2014 के बाद पारित भू-अर्जन प्रकरणों में लगभग 90 प्रतिशत पुनर्वास अनुदान का भुगतान पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष राशि का वितरण निरंतर जारी है।

निर्माण कार्यों की प्रगति पर नजर डालें तो परियोजना अंतर्गत 1295 मीटर लंबा एवं 24.22 मीटर ऊँचा स्पील-वे बांध, 142.90 मीटर तथा शेडल-2 बांध का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। कुल 311.945 किलोमीटर नहरों में से 252.36 किलोमीटर नहरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। 85 लघु नहरों में से 29 का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष नहरों का निर्माण कार्य तेज गति से प्रगति पर है। केलो वृहद सिंचाई परियोजना के माध्यम से रायगढ़, खरसिया एवं चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के कुल 164 ग्रामों की 21225 हेक्टेयर कृषि भूमि को खरीफ फसल हेतु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में 18515 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

केलो बांध से रायगढ़ शहर एवं आसपास के क्षेत्रों को पेयजल एवं निस्तार हेतु सतत जल प्रदाय किया जा रहा है। इसके लिए बांध में 4.44 मि.घ.मी. जल का प्रावधान रखा गया है। साथ ही क्षेत्र के औद्योगिक संस्थानों को भी जल आबंटन किया गया है, जिससे औद्योगिक विकास को भी बल मिला है। बांध निर्माण के बाद क्षेत्र में भू-जल स्तर में निरंतर सुधार दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, रायगढ़ जिला मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर पर्यटन सह पर्यावरणीय उद्यान का विकास किया गया है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। वर्ष 2015 से केलो बांध में प्रारंभ मत्स्य उत्पादन के माध्यम से अब तक 214 परिवारों को आजीविका का स्थायी साधन प्राप्त हुआ है। इस प्रकार, केलो वृहद सिंचाई परियोजना रायगढ़ जिले के लिए केवल एक सिंचाई योजना नहीं, बल्कि कृषि समृद्धि, जल सुरक्षा, रोजगार और सतत विकास की जीवनरेखा बनकर उभर रही है।