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छत्तीसगढ़ की मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और विष्णुदेव साय ने जताया दुख

 

लक्ष्य न्यूज़ प्रसिद्ध पंडवानी गायिका गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का देर रात निधन हो गया। रायपुर एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 70 साल की थीं। उन्होंने 13 साल की उम्र से अपनी आवाज का जादू बिखेरना शुरू कर दिया था।

[7/5, 1:58 PM] rajesh sharma78073: तीजन बाई पिछले कुछ समय से बीमार चल रहीं थीं। शनिवार, 4 जुलाई की देर रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में उनका निधन हु

पंडवानी गायिकी को दुनिया में पहचान दिलाई

तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायिकी को देश से लेकर विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर प्रस्तुति की कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में सुमार किया।

भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।

: छत्तीसगढ़ की पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, PM-CM ने जताय दुख

प्रसिद्ध पंडवानी गायिका गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का देर रात निधन हो गया। रायपुर एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 70 साल की थीं। उन्होंने 13 साल की उम्र से अपनी आवाज का जादू बिखेरना शुरू कर दिया था।छत्तीसगढ़ राजनीतिक खबर

तीजन बाई पिछले कुछ समय से बीमार चल रहीं थीं। शनिवार, 4 जुलाई की देर रात 3.15 बजे रायपुर एम्स में उनका निधन हुआ।रायपुर स्थानीय गाइड

पंडवानी गायिकी को दुनिया में पहचान दिलाई

तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी गायिकी को देश से लेकर विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को मंच पर प्रस्तुति की कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में सुमार किया।

भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया।समय और कैलेंडर

पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित

कला के क्षेत्र में तीजन बाई के इसी बेजोड़ योगदान के लिए भारत सरकार और अन्य संस्थाओं ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा। उन्हें साल 1988 में पद्म श्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जापानी पुरस्कार ‘फुकुओका पुरस्कार’ मिला और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से विभूषित किया गया। इसके अलावा बिलासपुर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डी. लिट की मानद उपाधि भी दी गई।

[7/5, 1:59 PM] rajesh sharma78073: जानें, तीजन बाई के बारे में

छत्तीसगढ़ के भिलाई के गांव गनियारी में जन्मी तीजन बाई के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था।

तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखतीं थीं और धीरे-धीरे उन्हें ये याद होने लगी।

उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया।

: 13 साल की उम्र में तीजन बाई ने अपनी पहली मंच प्रस्तुति दी।

1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2007 में नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया गया।

एक दिन प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तभी से तीजन बाई का जीवन बदल गया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी समेत कई लोगों के सामने देश-विदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

[7/5, 2:01 PM] rajesh sharma78073: उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की और मॉरीशस सहित 17 से अधिक देशों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी गायिका का डंका बजाया।