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बिजना में 951 बोरी अवैध धान जब्त—पर सवालों के घेरे में चेकपोस्ट व्यवस्था! सख़्त निगरानी के बावजूद भारी मात्रा में भंडारण… प्रशासनिक लापरवाही उजागर?

 

लक्ष्य न्यूज, अशोक सारथी धौंराभांठा:- छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पारदर्शी एवं निष्पक्ष धान खरीदी व्यवस्था की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन अवैध भंडारण के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में 19नवम्बर को कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर तथा एसडीएम घरघोड़ा दुर्गा प्रसाद अधिकारी के नेतृत्व में राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने तमनार तहसील के ग्राम बिजना में बड़ी कार्रवाई करते हुए माखन गुप्ता पिता भुनेश्वर गुप्ता के घर से 951 बोरी अवैध धान जब्त किया।

 

टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए धान को शासन की हिरासत में लिया।

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एसडीएम ने स्पष्ट कहा कि “धान खरीदी नीति में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, आगे भी ऐसी कार्रवाइयाँ लगातार जारी रहेंगी।”

 

लेकिन बड़ी कार्रवाई के बीच खड़े हो रहे हैं कई गंभीर सवाल

951 बोरी धान आखिर पहुँचा कैसे?

ओड़िशा सीमा के पास 5 सक्रिय चेकपोस्ट मौजूद होने के बावजूद इतनी भारी मात्रा में अवैध धान बिजना तक पहुँच जाना गंभीर सवाल खड़ा करता है।

 

क्या चेकपोस्ट पर मिलीभगत या ड्यूटी में लापरवाही?

जब हर एंट्री प्वाइंट पर कड़ी निगरानी का दावा किया जाता है, तब इतने बड़े स्तर पर अवैध धान का प्रवेश होना क्या चेकपोस्ट की व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर नहीं करता?

 

सूत्रों का बड़ा दावा — धान “सूखा तालाब मार्ग” से आया हो सकता है.

सूत्रों के अनुसार बिजना गांव सूखा तालाब वाले मार्ग के बेहद करीब है, और यह रास्ता अपेक्षाकृत कम निगरानी वाला माना जाता है। संभावना जताई जा रही है कि कोचियों ने मुख्य चेकपोस्टों से बचकर इसी रास्ते का उपयोग किया हो।

 

यह सवाल उठना स्वाभाविक है की

क्या प्रशासन इस वैकल्पिक मार्ग पर निगरानी बढ़ाने में नाकाम रहा है?

यदि हाँ, तो फिर चेकपोस्टों पर सख़्ती सिर्फ दिखावा तो नहीं?

 

कोचियों की नई चाल: किसानों के घरों में धान ‘छिपाना’!

जाँच टीम को ग्रामीणों से मिली सूचनाओं के अनुसार, कई कोचिये अब नए तरीके अपनाकर किसानों के घरों में ही भारी मात्रा में धान स्टॉक करवा रहे हैं, जिससे पकड़ में आना मुश्किल हो जाता है।

951 बोरी धान की बरामदगी इस नए गिरोहनुमा तंत्र के सक्रिय होने का संकेत देती है।

 

*शासन–प्रशासन के लिए बड़ा सबक और चेतावनी!*

चेकपोस्ट की जवाबदेही तय हो।

सूखा तालाब जैसे वैकल्पिक मार्गों पर विशेष निगरानी लगे।

कोचियों व दलालों का नेटवर्क चिन्हित हो

किसानों के घरों में धान छिपाने वाले गोरखधंधे पर कड़ा एक्शन हो।

प्रशासन की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन तभी प्रभावी मानी जाएगी जब ऐसी अवैध आवाजाही के स्रोत भी पकड़ में आएं।

951 बोरी की बरामदगी यह साफ़ बताती है कि जाँच और निगरानी तंत्र में अभी भी कई बड़े छेद मौजूद हैं, जिन्हें तुरंत बंद करने की जरूरत है।