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महिला थाना के दुष्कर्म व पॉक्सो प्रकरण में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी (पॉक्सो) रायगढ़ का फैसला, अवयस्क बालिका से दुष्कर्म का अपराध सिद्ध

 

महिला थाना रायगढ़ की सशक्त विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से आरोपी को कठोर दंड

न्यायालय का पीड़िता को 7 लाख रुपये क्षतिपूर्ति प्रदान करने का आदेश, बाल सुरक्षा मामलों में अहम संदेश

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एसएसपी का सख्त संदेश   अपराध के दोषियों को कठोर दंड दिलाना और पीड़ितों को जल्द न्याय सुनिश्चित करना रायगढ़ पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।”*

रायगढ़, 26 फरवरी। महिला थाना रायगढ़ में दर्ज दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर प्रकरण में माननीय न्यायालय ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। माननीय न्यायाधीश श्री देवेंद्र साहू, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीसी (पॉक्सो एक्ट) जिला रायगढ़ के न्यायालय में आज दिनांक 25 फरवरी 2026 को महिला थाना रायगढ़ में दर्ज पहले अपराध क्रमांक 01/2025 धारा 65(2), 137(2) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 5(ड), 6 पॉक्सो एक्ट के *आरोपी सूरज निषाद पिता हेम कुमार निषाद उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम जतरी मांझापारा थाना पुसौर जिला रायगढ़ (वर्तमान पता शहीद चौक थाना कोतवाली रायगढ़)* को 18 वर्ष से कम आयु की अवयस्क बालिका को बहला-फुसलाकर दुष्कर्म करने के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं ₹5000 के अर्थदंड से दंडित किया गया है।

प्रकरण के संबंध में महिला थाना रायगढ़ में पीड़िता की मां द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि उसकी नाबालिग बेटी दुकान आने-जाने के दौरान परिचित सूरज निषाद के संपर्क में थी। दिनांक 18 मार्च की रात्रि पीड़िता दुकान से रोते हुए घर पहुंची और बताया कि आरोपी उसे आइसक्रीम खिलाने का झांसा देकर गोद में उठाकर सुनसान स्थान पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। रिपोर्ट पर महिला थाना रायगढ़ में तत्काल *अपराध क्रमांक 01/2025 धारा 65(2) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 4 पॉक्सो एक्ट* के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। महिला थाना प्रभारी उपनिरीक्षक दीपिका निर्मलकर द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता का तत्काल मुलाहिजा कराया गया तथा आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विवेचना के दौरान साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण में *धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता एवं धारा 5(ड), 6 पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी* गईं।

प्रकरण की विवेचना महिला थाना प्रभारी उपनिरीक्षक दीपिका निर्मलकर द्वारा सुनियोजित एवं प्रभावी तरीके से पूर्ण की गई तथा अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री मोहन सिंह ठाकुर द्वारा न्यायालय में सशक्त पैरवी करते हुए अभियोजन साक्षियों के बयान एवं ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर माननीय न्यायालय ने आरोपी सूरज निषाद को धारा 137(2) भारतीय न्याय संहिता एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड) और 6 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास शेष प्राकृतिक जीवन के लिए एवं ₹5000 के अर्थदंड से दंडित किया है।

साथ ही माननीय न्यायालय द्वारा पीड़िता के पुनर्वास एवं सहायता के लिए राज्य की क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत ₹7,00,000 (सात लाख रुपये) की राशि प्रदान करने का आदेश भी दिया गया है। यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों पर कठोर दंड सुनिश्चित करने तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

एसएसपी शशि मोहन सिंह का संदेश

 

नाबालिगों एवं महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे जघन्य अपराधों में त्वरित विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन एवं प्रभावी अभियोजन के माध्यम से कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाएगा। रायगढ़ पुलिस पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।