ब्रेकिंग

लालच देकर धर्मांतरण कराने वालों की खैर नहीं! छत्तीसगढ़ में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ बना कानून, राज्यपाल ने किए हस्ताक्षर

लक्ष्य न्यूज़ : रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब लालच देकर धर्मांतरण कराने वालों की खैर नहीं, क्योंकि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक अब कानून बन गया है. राज्यपाल रमेन डेका ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके बाद ये कानून लागू हो गया है.

दरअसल, विधानसभा के बजट सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 पेश किया गया था. जिसे विपक्ष की गैर मौजूदगी में पास कर दिया गया था. अब राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ये कानून बन गया है. इसके तहत जबरन धर्मांतरण करवाने वालों पर सख्त सजा का प्रावधान है. सामूहिक धर्मांतरण का दोषी पाए जाने पर 25 लाख का जुर्माना और 20 साल तक की सजा होगी.

WhatsApp Image 2026-02-06 at 11.45.21
WhatsApp Image 2026-02-06 at 11.45.22
WhatsApp Image 2026-02-06 at 12.06.32
WhatsApp Image 2026-02-06 at 11.45.21 (1)
WhatsApp Image 2026-02-06 at 11.45.22 (1)
WhatsApp Image 2026-02-06 at 11.45.21 (2)

दोषी पाए जाने पर लगेगा ये जुर्माना और सजा

नए कानून के मुताबिक महिमामंडन करके, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव और मिथ्या जानकारी देकर धर्म परिवर्तन करना अवैध और प्रतिबंधित होगा. अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी.

इस कानून में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. अगर एक धर्म का व्यक्ति, दूसरे धर्म में शादी करता है तो ऐसी शादी को करवाने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसी शादी को करवाने वाला जिम्मेदार व्यक्ति विवाह की तारीख से आठ दिन पहले घोषणापत्र सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेगा.

सक्षम प्राधिकारी ये तय करेगा कि शादी कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, ऐसा हुआ तो अवैध घोषित किया जा सकेगा. विधेयक में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है.

अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है. सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है.