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जनजागरूकता और टीकाकरण के माध्यम से रेबीज से बचाव संभव रेबीज के लक्षण और बचाव के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने दी जानकारी

26 सितम्बर 2025/ शासन के निर्देशानुसार जिले में 28 सितम्बर तक विश्व रेबीज सप्ताह मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को रेबीज जैसे घातक वायरल संक्रमण के प्रति जागरूक करना और रोकथाम के उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.अनिल कुमार जगत ने जानकारी देते हुए बताया कि रेबीज एक जानलेवा वायरस संक्रमण है जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर, लोमड़ी, चमगादड़ आदि के काटने या खरोंचने से मनुष्यों में फैलता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह संक्रमण प्राणघातक साबित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सप्ताह जिला, नगर पालिका, विकासखंड और ग्राम स्तर पर मनाया जा रहा है। रेबीज के शुरुआती लक्षणों में घाव पर जलन, खुजली, दर्द, बुखार, बेचैनी, नींद न आना, गले में अकडऩ, पानी या रोशनी से डर लगना शामिल हैं। इन लक्षणों के दिखते ही तत्काल इलाज आवश्यक है। इसके लिए जिला और विकासखंड स्तर पर विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदायिक स्थलों पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

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स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घर-घर जाकर पालतू जानवरों के काटने पर प्राथमिक उपचार और टीकाकरण की जानकारी दी जा रही है। लोगों को यह बताया जा रहा है कि समय पर टीका वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन से रेबीज को रोका जा सकता है।

रेबीज सप्ताह में हो रहे विविध कार्यक्रम

रेबीज नियंत्रण हेतु आयोजित इस सप्ताह के दौरान डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, स्कूली बच्चों के लिए नाटक, भाषण, चित्रकला आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि वे इस खतरनाक बीमारी के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें। इस दौरान कार्यक्रम के संचालन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैकरा, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक सोनाली मेश्राम, जिला नोडल अधिकारी डॉ.सुमित शैलेन्द्र मंडल, डॉ. कल्याणी पटेल द्वारा किया जा रहा है।