
लक्ष्य न्यूज़ अशोक सारथी धौंराभांठा:- जिला कलेक्टर रायगढ़ के निर्देश पर तमनार ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत धौंराभांठा के सामुदायिक भवन में दिनांक 28 अक्टूबर 2025 को कोल माइंस सेक्टर-1 से प्रभावित ग्रामों की कोर कमेटी और जिंदल प्रबंधन समिति के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जमीन खरीदी, बिक्री, मुआवजा तथा जनसुनवाई से संबंधित विषयों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय करना था।

बैठक के प्रारंभ में जिंदल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष द्वारा प्रस्तावित कोल परियोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात सेक्टर-1 से प्रभावित 14 ग्रामों की सर्वसम्मति से गठित कोर कमेटी के प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगें चार बिंदुओं में रखीं—

बैठक में कोर कमेटी की ओर से साफ तौर पर किसी भी किम्मत पर जमीन नहीं देने की बात कही गई। परंतु सघन विचारों के उपरांत यदि किसी स्थिति में अगर हमें बाध्य हो कर जमीन देना पड़ रहा है तो निम्न बिंदुओं के आधार पर समझौते हेतु विचार किया जा सकता है
कोर कमेटी की प्रमुख मांगें..
1. प्रस्तावित कोल खदान का विरोध:
प्रभावित 14 गांवों की ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर खदान परियोजना का विरोध किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान खुलने से उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय संरचना बुरी तरह प्रभावित होगी। कृषि भूमि जो पीढ़ियों से आजीविका का प्रमुख साधन रही है, उसके अधिग्रहण से अनावश्यक विस्थापन की समस्या उत्पन्न होगी।
2. मुआवजा एवं भूमि मूल्य निर्धारण:
राष्ट्रीय विकास में सहयोग की भावना रखते हुए कोर कमेटी ने निम्न शर्तों पर समझौते की बात रखी—
परियोजना क्षेत्र की सभी जमीनों की एकमुश्त खरीदारी की जाए।
प्रति एकड़ ₹1 करोड़ 20 लाख मुआवजा राशि निर्धारित की जाए।
(यह राशि समीपवर्ती परियोजना क्षेत्र की ग्राम सभाओं द्वारा भी पारित की जा चुकी है।)
17–18 वर्षों से भूमि खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध रहने के कारण मूल्यवृद्धि नहीं हुई। यदि 2008 से प्रतिवर्ष 10% वृद्धि दर जोड़ी जाए तो वर्तमान मूल्य लगभग ₹1.21 करोड़ बनता है।
जो परिवार अपनी कृषि योग्य भूमि बेचे, उन्हें उसी प्रकार की दुगुनी भूमि वैकल्पिक रूप से प्रदान की जाए।
3. रोजगार की गारंटी:
प्रभावित प्रत्येक परिवार से प्रति दो एकड़ / प्रति राशन कार्ड एक सदस्य को JPL में रोजगार दिया जाए। यदि शैक्षणिक योग्यता नहीं है, तो प्रशिक्षण देकर नौकरी दी जाए। नौकरी न लेने की स्थिति में ₹10 लाख की मुआवजा राशि दी जाए।

4. संपूर्ण पुनर्वास व्यवस्था:
भूमि अधिग्रहण के साथ प्रभावित परिवारों के घर, आंगन, बाड़ी आदि का भी क्रय किया जाए तथा उन्हें अन्यत्र संपूर्ण पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। पुनर्वास स्थल पर सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल जैसी सभी जनसुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
ज्ञात हो कि यह मामला पिछले दो महीनों से लगातार तमनार ब्लॉक के 14 गांवों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 14 अक्टूबर 2025 को धौंराभांठा में प्रस्तावित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों के एकजुट विरोध के कारण प्रशासन ने जनसुनवाई को स्थगित कर दिया था।
इसके उपरांत कलेक्टर रायगढ़ द्वारा प्रबंधन कंपनी एवं कोर कमेटी को निर्देश दिए गए थे कि वे आपसी संवाद कर जनता की राय लेकर संतुलित समाधान निकालें।
आज सम्पन्न हुई इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई तथा आगामी दिनों में पुनः बैठक कर आगे की दिशा तय करने पर सहमति बनी।
निष्कर्ष
बैठक शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई और यह निर्णय लिया गया कि अगली बैठक में सभी पक्षों की राय लेकर जनहित व विकास के बीच संतुलित रास्ता निकाला जाएगा।




