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महिला आरक्षण पर भाजपा सरकार   की मंशा महिला आरक्षण की नहीं अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थी जनता को भ्रम परोस रही : शेषराज हरवंश 

 

 

लक्ष्य न्यूज़ रायगढ़ 25 अप्रैल। देश में महिला आरक्षण पर केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों के विरोध में 25 अप्रैल को कांग्रेस भवन रायगढ़ में महिला कांग्रेस पदाधिकारियों द्वारा पत्रकार वार्ता आहूत की गई थी जिसमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त रायगढ़ प्रभारी, विधायक पामगढ़ श्रीमती शेषराज हरवंश जी ने संबोधित किया और बताया कि 2023 में ही कांग्रेस के समर्थन से महिला आरक्षण बिल पास होकर महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित हो चुका है जिसे मोदी सरकार द्वारा अब तक लागू नहीं किया गया जो केंद्र की मोदी सरकार की विफलता को दर्शाता है अब जब एक प्रक्रिया के तहत जनगणना की शुरुआत हो चुकी है इस बीच मोदी सरकार विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन बिल को महिला आरक्षण बिल का चेहरा बनाते हुए महिला आरक्षण संशोधन बिल के नाम पर देश में भ्रम फैला रही है और कह रही कि महिला आरक्षण बिल को कांग्रेस ने गिरा दिया,कांग्रेस महिला हितैषी नहीं है कांग्रेस महिलाओ के साथ अन्याय की है महिलाओ का हक छीन रही है जबकि सच्चाई ये है कि 2023 में ही महिला आरक्षण बिल लाया गया था जिसे कांग्रेस ने समर्थन किया और बिल पास हो चुका है उस बिल को मोदी सरकार अब तक लंबित रखते हुए लागू ही नहीं किया ।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्रीमती हरवंश ने कहा कि

प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक झूठ बोल रहे हैं। भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार झूठा भ्रम फैलाया जा रहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए संसद में बिल पास नहीं हो सका।

महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 128यां संविधान संशोधन सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुकी है।

 

भाजपा 2023 के आरक्षण बिल को क्यों लागू नहीं कर रही है? इस बिल के आधार पर तुरंत आरक्षण प्रभावी हो सकता है।

भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी।

संसद में जो विधेयक गिरा उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सीटें 850 करने का प्रस्ताव था राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें।

परिसीमन विधेयक जिसमें परिसीमन के लिये 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की गयी थी। विधेयक में पांडुचेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गयी थी ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके।

जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है तो जनगणना के बाद आये नये आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा?

महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों नहीं देना चाहती मोदी सरकार? कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है।

सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति चंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया?

जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 जो कानून बन चुका है 2034 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता।

भाजपा की मंशा महिला आरक्षण की नहीं अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थीजो विपक्षी दलों की एकजुटता से पूरा नहीं हो सका।

महिला आरक्षण के इतिहास पर फोकस करते हुए बताया कि कांग्रेस शुरु से महिला आरक्षण की पक्षधर रही है

> पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। यह विधेयक लोकसमा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका।

अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए

महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ।

कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं।

सीटों के परिसीमन का भाजपा का षडयंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है।

इस प्रेस वार्ता में मुख्य रुप से रायगढ़ प्रभारी, विधायक पामगढ़ श्रीमती शेषराज हरवंश,लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार,पूर्व विधायक प्रकाश नायक,पूर्व महापौर जानकी काटजू, कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष शाखा यादव,पूर्व अध्यक्ष अनिल शुक्ला,दीपक पांडेय,विकास ठेठवार,संदीप अग्रवाल,वसीम खान,विकास शर्मा,शारदा सिंह गहलोत, रिंकी पांडेय,अरुणा चौहान,बरखा सिंह,रेखा वैष्णव,यशोदा कश्यप,रंजना पटेल,बीनू बेगम,अरुणा मेश्राम,संयुक्ता सिंह,उमा पटेल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस जनों की उपस्थिति रही।