
रायगढ़/ नीति ने हमारे प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और उनके परिवारों के जीवन में गंभीर असमंजस और गहरी आशंका उत्पन्न कर दी है। इस नीति के कारण यह भय लगातार गहराता जा रहा है कि कहीं प्रदेश के सरकारी स्कूलों का अस्तित्व ही खतरे में न पड़ जाए और शिक्षा गरीबों के लिए केवल एक दूर का सपना बनकर न रह जाए।

इस नीति से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार शिक्षा के अधिकार को कमजोर कर रही है, सरकारी स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है और निजीकरण को बढ़ावा देकर शिक्षा को अमीरों के लिए सुविधाजनक तथा गरीबों के लिए कठिन बना रही है।

आशंका यह भी है कि यदि यह नीति यथावत जारी रही तो आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूल केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे और शिक्षा का अधिकार केवल गिनी-चुनी कंपनियों के लाभ का साधन बन जाएगा। इससे ग्रामीण, आदिवासी और गरीब वर्ग के बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा और सामाजिक विषमता और गहराती चली जाएगी।
आम जनता, शिक्षक समुदाय और सामाजिक संगठनों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए हम निम्नलिखित मांगें आपके समक्ष रखते हैं:
हमारी प्रमुख मांगें
युक्तियुक्तकरण नीति को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और इस पर पुनर्विचार हेतु शिक्षाविदों, शिक्षक संगठनों और अभिभावकों से संवाद स्थापित किया जाए।
स्कूलों के जबरन विलय और शिक्षकों के मनमाने स्थानांतरण पर रोक लगाई जाए। वर्तमान स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित की जाए।
शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में आवश्यकतानुसार मानव संसाधन की पूर्ति हो सके।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों की संख्या और गुणवत्ता में वृद्धि की जाए, ताकि वहाँ के बच्चों को शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े और लड़कियों की शिक्षा व सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा के बजट में बढ़ोत्तरी कर अधोसंरचना विकास, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएँ सुलभ कराई जाएं।
शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए स्थानांतरण एवं पद समाप्ति से जुड़े सभी निर्णयों को शिक्षक संगठनों के साथ सहमति के आधार पर ही लिया जाए।
शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने वाली सभी नीतियों पर रोक लगाई जाए और शिक्षा को गरीब व मध्यम वर्ग के लिए सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाए रखा जाए।
- अतः आपसे आग्रह है कि प्रदेश के बच्चों के भविष्य और सामाजिक न्याय की भावना को ध्यान में रखते हुए हमारी उपरोक्त मांगों पर अविलंब कार्यवाही करें। नीति रोकी नहीं गई तो जनता सड़क पर उतरकर अपना विरोध प्रदर्शन करेगी।




