
लक्ष्य न्यूज़ रायगढ़। हाथियों के लगातार विचरण के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर लैलूंगा वन विभाग की सतर्कता और सक्रिय निगरानी का बड़ा असर सामने आया है। वन क्षेत्र में वन्यजीवों के शिकार के उद्देश्य से विद्युत करंट प्रवाहित करने के लिए बिछाए गए तार के मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल दाखिल कराया गया

यह पूरी कार्रवाई धरमजयगढ़ वन मंडलाधिकारी सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन एवं लैलूंगा वन परिक्षेत्र अधिकारी ए.एस. किंडो के नेतृत्व में वन अमले और ट्रैकिंग टीम की सक्रियता से की गई। विभागीय टीम की लगातार निगरानी के चलते विद्युत तार बिछाकर वन्यजीवों के शिकार की कोशिश का समय रहते पता चला और आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली।

जानकारी के अनुसार, 18 सितंबर से लैलूंगा वन परिक्षेत्र में हाथियों का एक बड़ा दल विचरण कर रहा है। हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग के कर्मचारी और ट्रैकर दिन-रात नजर बनाए हुए थे। मानव-हाथी द्वंद्व की आशंका को देखते हुए विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को लगातार सतर्क किया जा रहा था। हाथियों के संभावित विचरण क्षेत्र में आने वाले गांवों के सरपंचों को सूचना देने के साथ ही कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराकर ग्रामीणों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही थी।

वन विभाग के अनुसार, 19 सितंबर की रात करीब 12 बजे कक्ष क्रमांक 302 पीएफ क्षेत्र में हाथियों का दल विचरण कर रहा था। इसी दौरान हाथियों के विद्युत तार के संपर्क में आने से मौके पर चिंगारी और आग की लपटें दिखाई दीं। साथ ही हाथी की चिंघाड़ सुनाई देने से वन अमले को किसी अनहोनी की आशंका हुई। हाथियों के आगे निकल जाने के बाद वन विभाग की टीम ने तत्काल संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के दौरान वहां जीआई तार को बांस की खूंटियों के सहारे बिछाकर विद्युत प्रवाह देने की व्यवस्था पाए जाने की जानकारी सामने आई। मौके पर कांच की शीशियों का भी इस्तेमाल किए जाने की बात वन विभाग ने बताई।
घटना की जानकारी मिलते ही वन अमले और ट्रैकिंग टीम ने आरोपियों की तलाश और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रात में ही निगरानी शुरू कर दी। विभागीय टीम की सतर्कता रंग लाई और करीब सुबह 3 बजे चार व्यक्ति बिछाए गए विद्युत तार को निकालने के लिए मौके पर पहुंचे। वनकर्मियों और ट्रैकर्स ने तत्काल घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को मौके से पकड़ लिया गया, जबकि दो आरोपी भागने में सफल रहे। इसके बाद फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई।
वन विभाग की टीम ने लगातार तलाश और पूछताछ के बाद फरार दोनों आरोपियों को भी पकड़ लिया। विभाग के अनुसार, पूछताछ में चारों आरोपियों से विद्युत तार बिछाकर करंट प्रवाहित किए जाने के संबंध में जानकारी सामने आई। इसके बाद वन विभाग ने प्रकरण क्रमांक 20290/16, दिनांक 20 सितंबर 2026 दर्ज करते हुए भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की। चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल दाखिल करा दिया गया।


