
लक्ष्य न्यूज़ रायगढ़:- होली दहन के दौरान पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने कहा होलिका दहन की परम्पराओ में ईश्वर की भक्ति का अदभुत दर्शन है। इन्हीं परंपराओं से समाज को सीख लेने की आवश्यकता जताते हुए होलिका दहन की परम्परा पर प्रकाश डालते हुए पूज्य पाद ने कहा हिरणकश्यप नामक राक्षस ने भक्ति से भगवान को प्रसन्न कर चतुराई से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु नर और पशु के हाथों से ना हो उसकी मृत्यु ना ही धरती में हो और ना ही आकाश में हो और ना घर के बाहर हो और ना ही घर के अंदर हो अस्त्र शस्त्र से भी उसे मारा ना जा सके। मनचाहा वर मांग हासिल कर हिरण्यकश्यप राक्षस उसका लाभ समाज को देने की बजाय स्वयं को भगवान समझ कर मनमानी करने लगा जनता भी उससे भयभीत रहने लगी।

भयवश जनता भगवान की भक्ति की बजाय राक्षस की पूजा करने लगी।लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु की भक्ति में सदा लीन रहता था यह बात धीरे जनता के मध्य फैलने लगी। क्रोधित हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे को ईश्वर भक्ति से रोकने का बार बार प्रयास किया लेकिन स्वयं हरि ने भक्त प्रहलाद की रक्षा की। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को जब यह सब कुछ पता चला तो उसने अपने भाई से कहा कि उसे ईश्वर का वरदान हासिल है कि होलिका को अग्नि नहीं जला सकती वो भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर बैठ जाएगी और आस पास मौजूद लकड़ियों में आग लगा दी जाए जिससे भक्त प्रह्लाद तो आसानी से जल जायेगा और वरदान की वजह से होलिका बच जाएगी। भगवान विष्णु ने होलिका की दुर्भावना को समझ लिया और ईश्वरीय चमत्कार से वरदान प्राप्त होलिका तो जल गई लेकिन भक्त प्रह्लाद को भगवान ने बचा लिया। पूज्य बाबा ने होली के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं देते हुए पश्चिमी सभ्यता से दूर रहने का आह्वान किया । युवाओं से कहा कि वे भारतीय त्योहारों के जरिए मिलने वाले संदेशों को अपने व्यवहारिक जीवन में उतारे। शक्तिशाली राक्षस के सामने भगवान विष्णु ने किसी तरह अपने भक्त प्रह्लाद को बचाया यह आम जनता के लिए संदेश है कि भक्ति से ईश्वर की आसानी से पाया जा सकता है और जो ईश्वर की भक्ति निश्चल मन से करते है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। होली केवल बाहरी रंग लगाने का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मा को शांति, प्रेम, आनंद और पवित्रता से भरने का अवसर है। यह पर्व हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को जलाने और पवित्रता एवं आनंद को जागृत करने का संदेश देता है । होली का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए पूजी पाद प्रियदर्शी राम ने कहा होली का त्यौहार मनुष्य के भीतर मौजूद विकारों क्रोध, अहंकार, लोभ, मोह को जलाने और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी और आनंद आत्मा के भीतर से आते हैं, न कि बाहरी रंगों से

होली के आध्यात्मिक संदेश को अपनाने के लिए, हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को जलाने और पवित्रता एवं आनंद को जागृत करने का प्रयास करना चाहिए। हमें अपने जीवन में प्रेम, शांति, और आनंद को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए ।




